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History of Ramadan Month (रमज़ान माह का इतिहास)

Festival: Ramzan

इस्लाम धर्म में अच्छा इन्सान बनने के लिए पहले मुसलमान बनना आवश्यक है। अरबी लुगद (डिक्‍शनरी) के मुताबिक मुसलमान का मतलब होता है 'पक्‍के ईमान वाला'। मुसलमान बनने के लिए पांच कर्तव्यों का पालन करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति इन पांच कर्तव्यों में से किसी एक को भी ना माने, तो वह मुसलमान नहीं हो सकता। वो कतर्व्‍य हैं- पहला- ईमान यानी कलिमा तय्यब, जिसमें अल्लाह के परम पूज्य होने का इकरार, उसके एक होने का यकीन और मोहम्मद साहब के आखिरी नबी होने का यकीन करना। दूसरा नमाज़, जिसके अंतर्गत एक मुसलमान को नमाज पढ़ना चाहिये। तीसरा रोज़ा, चौथा हज और पांचवां ज़कात। यदि कोई व्यक्ति मुसलमान होकर इस सब पर अमल न करे, तो वह अपने मजहब के लिए झूठा है। रमज़ान का इतिहास- रमज़ान इस्‍लाम कैलेंडर का नवां महींना होता है। रमज़ान का मतलब होता है प्रखर। सन् 610 में लेयलत उल-कद्र के मौके पर जब मुहम्‍मद साहब को कुरान शरीफ के बारे में पता चला, तभी इस महीने को पवित्र माह के रूप में मनाया जाने लगा। क्‍या कहते हैं मौलाना साहब- रमजान की फ़ज़ीलत पर रौशनी डालते हुए मुस्लिम धर्म गुरु लखनऊ के मौलाना यासूब अब्बास कहते हैं कि ये महिना अल्लाह का है जिसे रूह हुल्लाह खैरुल्लाह भी कहते हैं। ये महिना नेमतों का महिना है, बरकतों का महिना है, अजमतों का महिना है। इस महीने में अल्लाह अपने बन्दों के लिए बरकतों के दरवाज़े खोलता है। इस महीने में अल्लाह सबको रिज्क देता है, उनके सभी गुनाह- गुनाहे कबीरा, गुनाहे सगीरा माफ़ करता है, मौलाना ने ये भी कहा कि अल्लाह ने अपनी किताब में फ़रमाया है कि उसके नेक बन्दे जितना हो सके अपनी नफ्ज़ पर कंट्रोल रखें,ऐसा करके उन बन्दों का शुमार अल्लाह के करीबियों में उनके मेहबूबों में होगा। फितरे के सवाल पर जानकारी देते हुए मौलाना ने कहा कि इस रमजान महीने के अंत में दिया जाने वाला फितरा एक तरह का टोकन अमाउंट होता है जो उस इंसान को ये बताता है कि अल्लाह की नज़र में सब बराबर हैं। जब कोई अमीर आदमी ये टोकन अमाउंट अपने ख़ुदा की तरफ से किसी ग़रीब हो देता है तब उसे ये एहसास होता है कि आख़िर भूख क्या होती है भूख का एहसास क्या होता है , अल्लाह अमीर बन्दे को इस टोकन के ज़रिये एक ग़रीब का दरवाज़ा दिखाता है, इस टोकन का पैगाम ये है कि इस दुनिया में कोई भी ग़रीब नहीं है कोई भी बेसहारा नहीं है अल्लाह सबके साथ है। साथ ही मौलाना यासूब अब्बास ने ये भी कहा कि अगर आज इंसान इन सब बातों को मान ले तो इस दुनिया में कोई भी ग़रीब और बेसहारा नहीं रहेगा और सब तरफ अमन और सुकून रहेगा।

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