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Ravidas Jayanti

Ravidas Jayanti

Category: Jayanti
Celebrated In: India in Spring Season
Celebrated By: Hindu (Hindu)
संत रविदास जयंती के दिन उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करके, उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया जाता है। संत रविदास बाल्यकाल से ही प्रतिभा के धनी थे। उनकी मधुर वाणी और व्यवहार से हर कोई प्रसन्न रहता था। संत रविदास का जन्म उत्तर प्रदेश में बनारस के सीरगोवर्धन गांव में हुआ था। उनकी माता कालसा देवी और बाबा संतोख दासजी वाराणसी के निवासी थे। यहां पर प्रत्येक वर्ष  रविदास जयंती समारोह बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।  

संत रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में माना जाता है, हालांकि उनके जन्म की तारीख के विषय में कुछ विवाद भी हैं, लेकिन अधिकांशतः माघ मास की पूर्णिमा ( माघी पूर्णिमा ) के दिन उनका जन्मदिवस मनाया जाता है। संत रविदास जी का जीवन काल 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच (1450 से 1520 तक) माना जाता है। 

संत रविदास के पिता बाबा संतोख दासजी मल साम्राज्य के राजा नगर के सरपंच थे और चर्मकार समाज से थे। वह जूते बनाने और उनकी मरम्मत का कार्य भी करते थे। शुरुआती दिनों में रविदास जी भी उनके काम में हाथ बंटाते थे। 

रविदास जी ने भक्ति और साधना से प्रभु की पूजा की, वह संत होने के साथ ही कवि और भगवान भक्त भी थे। उनकी रचनाओ में भक्ति की भावना और आत्म उत्थान के प्रयास दिखाई पड़ते है। संत रविदास जी ने लोगों को ईश्वर प्राप्ति के लिए भक्ति मार्ग पर चलने की सीख दी। उन्होंने स्वंय भी भक्ति के मार्ग पर चलकर दिव्य ज्ञान से भगवान की प्राप्ति की। 

संत रविदास जी ने भगवान श्री राम के विभिन्न स्वरुपों राम, रघुनाथ, राजा रामचन्द्र, कृष्ण, गोविंद आदि नामों की भक्ति करते हुए अपनी भावनाओं को कलमबद्ध किया और उनके माध्यम से समाज में बराबरी के भाव का प्रसार किया। रविदास जी के द्वारा बचपन में अपने दोस्त को जीवन देने, पानी पर पत्थर तैराने, कुष्ठरोगियों को ठीक करने जैसे उनके चमत्कारों के किस्से काफी प्रचलित हैं। 

संत रविदास जी को मीरा बाई का आध्यात्मिक गुरु माना जाता है। उनके सम्मान में मीराबाई ने लिखा भी है, "गुरु मिलीया रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी, चोट लगी निजनाम हरी की महारे हिवरे खटकी।"

भारत में भक्ति आंदोलन के अग्रणी संतों में रविदास जी को भी गिना जाता है। निर्गुण धारा के संत रविदास की ईश्वर में अटूट श्रद्धा थी। विशेष तौर पर उत्तर भारत में उन्होंने समाज में सम भाव बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। वह न केवल एक महान संत थे, बल्कि एक कवि, समाज सुधारक और दर्शनशास्त्री भी थे। संत रविदास को मध्यकालीन कवि एवं समाज सुधारक माना जाता है, जिन्होंने अपने दोहों और उपदेशों के माध्यम से सामाज में फैले जातिगत भेदभाव के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। 

रविदास जी को बचपन से ही सामाजिक भेदभाव को दूर करने में विशेष रूचि थी। वह बचपन से ही बहुत साहसी और बहादुर थे और साथ ही ईश्वर के बड़े भक्त भी। समाज में भाईचारा और बराबरी का संदेश प्रसारित करने में उनका काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा। जाति प्रथा को लेकर समाज में बनी रुढ़ीवादिता पर उन्होंने कड़ा प्रहार किया और समाज में बराबरी का भाव फैलाया। संत रविदास जी ने समाज में फैले भेदभाव से आगे बढ़कर कार्य करने का प्रयास किया। अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान के संदेश दिये है। 

उन्होंने समाज में फैले भेदभाव को दूर करने के लिए प्रेम और सद्भाव को चुना तथा सभी को इसका पाठ पढ़ाया। यह सब उनकी भक्ति और सेवाभाव का ही प्रतिफल था कि उन्हें धर्म और जातिगत बंधनों से ऊपर सभी वर्गों के लोगो द्वारा पसंद किया जाता था, वे सभी के प्रिय संत थे। आज भी संत रविदास जी के वचन, दोहे और रचनाएं लोगो को प्रेरणा देने के साथ ही मार्गदर्शन भी करते हैं। विशेष तौर पर युवाओं को उत्तम जीवन जीने की शिक्षा देते हैं। 

संत रविदास जी के विषय में जितना लिखा जाए, पढ़ा जाए... कम ही रहेगा। उनकी महानता की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है। प्रत्येक वर्ष संत रविदास जयंती पर देशभर में आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं। 

Ravidas Jayanti Dates

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