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Hariyali Amavasya

Hariyali Amavasya

Category: Festival
Celebrated In: India in Rain Season
Celebrated By: Hindu (Hindu)
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। श्रावण मास दौरान पड़ने की वजह से इसे श्रावण अमावस्या या श्रावणी अमावस्या भी कहा जाता है। इसे महाराष्ट्र में गटारी अमावस्या कहते हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में चुक्कला एवं उड़ीसा में चितलागी अमावस्या कहते हैं। इस अमावस्या पर शिवजी के साथ ही देवी पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय स्वामी और नंदी की विशेष पूजा की जाती है।

इस दिन वृक्षारोपण करना अतिशुभ माना गया है। हरियाली अमावस्या के दिन विष्णुप्रिय वृक्ष पीपल, बरगद, तुलसी, केला, नींबू, आदि का वृक्षारोपण करना शुभ माना जाता है।

भारतीय संस्कृति में पेड़ों को देवता के रूप में पूजने की परंपरा रही है। सभी लोगों को घरों में पेड़ लगाने के बारे में शुभाशुभ जानना आवश्यक होता है। ऐसी मान्यता है, कि प्रत्येक व्यक्ति की राशि का एक प्रतिनिधि वृक्ष होता है। इसके सान्निध्य और रोपण से शुभफल मिलता है।

आइए जानें हरियाली अमावस्या के दिन किस राशि वालों को कौन-सा पौधा लगाना शुभ रहेगा -

1. मेष : लाल चंदन
2. वृष : सप्तपर्णी
3. मिथुन : कटहल
4. कर्क : पलाश
5. सिंह : पाडल
6. कन्या : आम
7. तुला : मौलश्र‍ी
8. वृश्चिक : खैर
9. धनु : पीपल
10. मकर : शीशम
11. कुंभ : कैगर खैर
12. मीन : बरगद

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में राशि के अनुसार पेड़ लगाना सकारात्मक फलदायक माना जाता है। 

इसी प्रकार दिशा के अनुसार पेड़ लगाने की अपनी महत्ता है। प्रत्येक दिशा में एक प्रतिनिधि वृक्ष दिग्पाल के रूप में दिशाओं की रक्षा करता है। आठ दिशाओं के प्रतिनिधि वृक्ष भवन तथा भूमि पर लगाने से मंगलकारी होते हैं। आठों दिशाओं के अनुरूप लगाए जाने वाले वृक्षों को अष्टदिग्पाल वृक्ष कहा जाता है ये वृक्ष निम्नलिखित है। 

उत्तर में जामुन, उत्तर पूर्व में हवन, उत्तर पश्चिम में सादड़, पश्चिम में कदम्ब, दक्षिण पश्चिम में चंदन, दक्षिण में आंवला पूर्व में बांस तथा दक्षिण पूर्व में गूलर अष्टदिग्पाल वृक्ष पाए जाते हैं। हरियाली अमावस्या पर वृक्ष लगाकर न केवल प्रकृति की सेवा की जाती है बल्कि इससे ईश्वरीय कृपा की भी प्राप्ति होती है।

हरियाली अमावस्या के दिन निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें -

1. श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्व है इसीलिए हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिवजी का पूजन-अर्चन किया जाता है। हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव को सफेद आखे के फूल, बिल्व पत्र और भांग, धतूरा चढ़ाएं।

2. सावन की हरियाली अमावस्या के दिन नदी, तालाब और सरोवर में स्नान करना बहुत उत्तम बताया गया है।

3 . हरियाली अमावस्या के दिन पौधा रोपण या वृक्षारोपण का बहुत अधिक महत्व है। आम, आंवला, पीपल, वटवृक्ष और नीम के पौधों को रोपने का विशेष महत्व बताया गया है। वृक्ष रोपण करने से ग्रह नक्षत्र और पितृदोष शांत हो जाते हैं।

4. इस दिन शिव जी की विधिवत पूजा करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होगी।

5. हरियाली अमावस्या के दिन व्यक्ति पर नकारात्मक सोच का प्रभाव रहता है। ऐसे में नकारात्मक शक्तियां उपने प्रयोग करने के प्रयास करती है अतः  हनुमान जी का ध्यान करते रहना चाहिए।

6. इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें साथ ही सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।

7. हरियाली अमावस्या की रात्रि में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वास्तिक या ॐ बनाकर और उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखें फिर विधिवत पूजा अर्चना करें, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी जी स्थिर निवास करेंगी और आपको सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी।

8. हरियाली अमावस्या के दिन शिवजी और श्री विष्णु के मंत्रों का जाप और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।

Hariyali Amavasya Dates

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