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Ahoi Ashtami

Ahoi Ashtami

Ahoi Ashtami in 2021 »   28 October

Ahoi Ashtami in 2022 »   17 October

Ahoi Ashtami in 2023 »   5 November

Category: Festival
Celebrated In: India
Celebrated By: Hindu (Hindu)

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन किया जाता है। इसलिए इसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। एक मान्यता के अनुसार इस दिन से दीपावली पर्व का प्रारम्भ समझा जाता है। करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता का व्रत किया जाता है। 

पुत्रवती महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह व्रत पुत्र की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं। संतान की शुभता को बनाये रखने के लिये क्योकि यह उपवास किया जाता है। इसलिये इसे केवल माताएं ही करती है। अहोई अष्टमी के उपवास को करने वाली माताएं इस दिन प्रात:काल उठकर, एक कोरे करवे (मिट्टी का बर्तन) में पानी भर कर, माता अहोई की पूजा करती है। 

माताएं अहोई अष्टमी के व्रत में दिन भर उपवास रखती हैं और सायंकाल आकाश में तारे दिखाई देने के समय होई माता का पूजन किया जाता है। पूरे दिन बिना कुछ खाये व्रत किया जाता है। सांय काल में अहोई माता को फलों का भोग लगाकर, फिर से पूजन किया जाता है। सांयकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई माता का विधि पूर्वक पूजन किया जाता है और तारों को करवे से अर्ध्य दिया जाता है। 

अहोई माता गेरु आदि के द्वारा दीवार पर बनाई जाती है अथवा किसी मोटे वस्त्र पर होई काढकर पूजा के समय उसे दीवार पर टांग दिया जाता है। श्री अहोई माता के चित्रांकन में ज्यादातर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास साही तथा उसके बच्चों की आकृतियां बना दी जाती हैं। कुछ मीठा बनाकर, माता को भोग लगा कर संतान के हाथ से पानी पीकर व्रत को पूर्ण किया जाता है। 

अहोई अष्टमी पर्व का महत्व इसकी कथा द्वारा भी प्रलक्षित होता है। जिसके अनुसार, प्राचीन काल में दतिया नगर में चंद्रभान नाम का एक साहूकार रहता था। उसकी बहुत सी संताने थी, परंतु उसकी संताने अल्प आयु में ही अकाल मृत्यु को प्राप्त होने लगती हैं। अपने बच्चों की अकाल मृत्यु से पति पत्नी दुखी रहने लगते हैं। 

कोई संतान न होने के कारण वह पति पत्नी अपनी धन दौलत का त्याग करके वन की ओर चले जाते हैं और बद्रिकाश्रम के समीप बने जल के कुंड के पास पहुँचते हैं तथा वहीं अपने प्राणों का त्याग करने के लिए अन्न जल का त्याग करके बैठ जाते हैं। इसी तरह छह दिन बीत जाते हैं तब सातवें दिन एक आकाशवाणी होती है कि, हे साहूकार तुम्हें यह दुख तुम्हारे पूर्व जन्म के पाप से मिल रह है। 

अत: इन पापों से मुक्ति के लिए तुम्हें अहोई अष्टमी के दिन व्रत का पालन करके अहोई माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। जिससे प्रसन्न होकर अहोई माता तुम्हें पुत्र की दीर्घ आयु का वरदान देंगी। इस प्रकार दोनो पति पत्नी अहोई अष्टमी के दिन व्रत करते हैं और अपने पापों की क्षमा मांगते हैं। जिससे अहोई माँ प्रसन्न होकर उन्हें संतान की दीर्घायु का वरदान देतीं हैं।

Ahoi Ashtami Dates

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