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Ahoi Ashtami

Ahoi Ashtami

Category: Festival
Celebrated In: India
Celebrated By: Hindu (Hindu)

संतान की शुभता को बनाये रखने के लिये क्योकि यह उपवास किया जाता है। इसलिये इसे केवल माताएं ही करती है।  एक मान्यता के अनुसार इस दिन से दीपावली पर्व का प्रारम्भ समझा जाता है। अहोई अष्टमी के उपवास को करने वाली माताएं इस दिन प्रात:काल उठकर, एक कोरे करवे (मिट्टी का बर्तन) में पानी भर कर, माता अहोई की पूजा करती है।  

पूरे दिन बिना कुछ खाये व्रत किया जाता है। सांय काल में अहोई माता को फलों का भोग लगाकर, फिर से पूजन किया जाता है। सांयकाल में तारे दिखाई देने के समय अहोई का पूजन किया जाता है। तारों को करवे से अर्ध्य दिया जाता है।  और गेरूवे रंग से दीवार पर बनायीं गयी अहोई माता का सांयकाल में पूजन किया जाता है। कुछ मीठा बनाकर, माता को भोग लगा कर संतान के हाथ से पानी पीकर व्रत का समापन किया जाता है। 

अहोई अष्टमी पर्व का महत्व इसकी कथा द्वारा भी प्रलक्षित होता है। जिसके अनुसार, प्राचीन काल में दतिया नगर में चंद्रभान नाम का एक साहूकार रहता था। उसकी बहुत सी संताने थी, परंतु उसकी संताने अल्प आयु में ही अकाल मृत्यु को प्राप्त होने लगती हैं। अपने बच्चों की अकाल मृत्यु से पति पत्नी दुखी रहने लगते हैं। 

कोई संतान न होने के कारण वह पति पत्नी अपनी धन दौलत का त्याग करके वन की ओर चले जाते हैं और बद्रिकाश्रम के समीप बने जल के कुंड के पास पहुँचते हैं तथा वहीं अपने प्राणों का त्याग करने के लिए अन्न जल का त्याग करके बैठ जाते हैं। इसी तरह छह दिन बीत जाते हैं तब सातवें दिन एक आकाशवाणी होती है कि, हे साहूकार तुम्हें यह दुख तुम्हारे पूर्व जन्म के पाप से मिल रह है। 

अत: इन पापों से मुक्ति के लिए तुम्हें अहोई अष्टमी के दिन व्रत का पालन करके अहोई माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। जिससे प्रसन्न होकर अहोई माता तुम्हें पुत्र की दीर्घ आयु का वरदान देंगी। इस प्रकार दोनो पति पत्नी अहोई अष्टमी के दिन व्रत करते हैं और अपने पापों की क्षमा मांगते हैं। जिससे अहोई माँ प्रसन्न होकर उन्हें संतान की दीर्घायु का वरदान देतीं हैं। 

Ahoi Ashtami Dates

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