» गोवर्धन पूजा पर्व का विधान

दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा मनाई जाती है, इस दिन गोवेर्धन पूजा, गोपूजन, और अन्नकूट पर्व भी होता है। गोवर्धन पूजा में सुबह मकान के दरवाजे के आगे गाय के गोबर की मूर्ति बनाकर और उसमे लेप लगाकर उसकी पूजा अर्चना की जाती है, साथ मे गौ पूजन भी रखा जाता है। 

इस शुभ दिन में चन्द्र दर्शन को अशुभ माना जाता है, प्रतिपदा के ही दिन यदि भैया दूज भी हो तो एक दिन पहले ही अन्नकूट पर्व मना लिया जाता है।  भगवान को भिन्न भिन्न प्रकार के पकवान बनाकर पके हुए चावल के पर्वत के आकार में अर्पित किये जाते हैं इसे 56 भोग भी कहा जाता हैं। गोवेर्धन पूजा के दिन मार्गपाली और राजा बलि की भी पूजा की जाती है। मार्गपाली के बंद नवार के नीचे से होकर निकलने से सभी प्रकार की सुख शांति मिलती है और कई रोग भी दूर हो जाते है। 

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