» नवरात्र घट स्थापना मंत्र (Kalash Sthapana mantra)

नवरात्र घट स्थापना मंत्र (Kalash Sthapana mantra)

Posted On: 04 Apr, 2013| Festival: Chaitra Navratri Festival

नवरात्र आदिशक्ति की पूजा-उपासना का महापर्व है, नवरात्र में पूजा के अवसर पर दुर्गासप्तशती का पाठ करने से देवी प्रसन्न होती हैं. सप्तशती का पाठ करने पर उसका सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है. श्रीदुर्गासप्तशती, भगवती दुर्गा का ही स्वरूप है. इस पुस्तक का पाठ करने से पूर्व इस मंत्र द्वारा पंचोपचारपूजन करें-

नमोदेव्यैमहादेव्यैशिवायैसततंनम:। नम: प्रकृत्यैभद्रायैनियता:प्रणता:स्मताम्॥

यदि  दुर्गासप्तशती का पाठ करने में असमर्थ हों तो सप्तश्लोकी दुर्गा को पढें. इन सात श्लोकों में सप्तशती का संपूर्ण सार समाहित होता है.
अथ सप्तश्लोकी दुर्गा
शिव उवाच :

देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।
कलौ कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥


देव्युवाच :

श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्ट्साधनम् ।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते


विनियोग :

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ॠषिः, अनुष्टुप
छन्दः, श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वत्यो देवताः, श्री दुर्गाप्रीत्यथं
सप्तश्लोकी दुर्गापाठे विनियोगः ।

1 –ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ।

बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥ १ ॥

2 – दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥ २ ॥

3 – सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।

शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते ॥ ३ ॥

 4 – शरणागतदीनार्तपरित्राणे ।
       सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ॥ ४ ॥

 5 – सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
       भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते ॥ ५ ॥

6 – रोगानशेषानपहंसि तुष्टा

    रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां

7 – त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्र्यन्ति ॥ ६ ॥
      सर्वबाधाप्रश्मनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि ।
     एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ॥ ७ ॥


    ॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्ण ॥

नवरात्रके प्रथम दिन कलश (घट) की स्थापना के समय देवी का आवाहन इस प्रकार करें. भक्त प्राय: पूरे नवरात्र उपवास रखते हैं. सम्पूर्ण नवरात्रव्रत के पालन में असमर्थ लोगों के लिए सप्तरात्र,पंचरात्र,युग्मरात्रऔर एकरात्रव्रत का विधान भी है. प्रतिपदा से सप्तमी तक उपवास रखने से सप्तरात्र-व्रत का अनुष्ठान होता है. अष्टमी के दिन माता को हलुवा और चने का भोग लगाकर कुंवारी कन्याओं को खिलाते हैं तथा अन्त में स्वयं प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण (पूर्ण) करते हैं.

नवरात्रके नौ दिन साधना करने वाले साधक प्रतिपदा तिथि के दिन शैलपुत्री की, द्वितीया में ब्रह्मचारिणी, तृतीया में चंद्रघण्टा, चतुर्थी में कूष्माण्डा, पंचमी में स्कन्दमाता, षष्ठी में कात्यायनी, सप्तमी में कालरात्रि, अष्टमी में महागौरी तथा नवमी में सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं. तथा दुर्गा जी के 108 नामों को मंत्र रूप में उसका अधिकाधिक जप करें.

अब एक दूसरी स्वच्छ थाली में स्वस्तिक बनाकर उस पर पुष्प का आसन लगाकर दुर्गा प्रतिमा या तस्वीर या यंत्र को स्थापित करें। अब निम्न प्रकार दुर्गा पूजन करे:-

स्नानार्थ जलं समर्पयामि (जल से स्नान कराए)
स्नानान्ते पुनराचमनीयं जल समर्पयामि (जल चढ़ाए)
दुग्ध स्नानं समर्पयामि (दुध से स्नान कराए)
दधि स्नानं समर्पयामि (दही से स्नान कराए)
घृतस्नानं समर्पयामि (घी से स्नान कराए)
मधुस्नानं समर्पयामि (शहद से स्नान कराए)
शर्करा स्नानं समर्पयामि (शक्कर से स्नान कराए)
पंचामृत स्नानं समर्पयामि (पंचामृत से स्नान कराए)
गन्धोदक स्नानं समर्पयामि (चन्दन एवं इत्र से सुवासित जल से स्नान करावे)
शुद्धोदक स्नानं समर्पयामि (जल से पुन: स्नान कराए)
यज्ञोपवीतं समर्पयामि (यज्ञोपवीत चढ़ाए)
चन्दनं समर्पयामि (चंदन चढ़ाए)
कुकंम समर्पयामि (कुकंम चढ़ाए)
सुन्दूरं समर्पयामि (सिन्दुर चढ़ाए)
बिल्वपत्रै समर्पयामि (विल्व पत्र चढ़ाए)
पुष्पमाला समर्पयामि (पुष्पमाला चढ़ाए)
धूपमाघ्रापयामि (धूप दिखाए)
दीपं दर्शयामि (दीपक दिखाए व हाथ धो लें)
नैवेध निवेद्यामि (नेवैध चढ़ाए(निवेदित) करे)
ऋतु फलानि समर्पयामि (फल जो इस ऋतु में उपलब्ध हो चढ़ाए)
ताम्बूलं समर्पयामि (लौंग, इलायची एवं सुपारी युक्त पान चढ़ाए)
दक्षिणा समर्पयामि (दक्षिणा चढ़ाए)


इसके बाद कर्पूर अथवा रूई की बाती जलाकर आरती करे।

World Trade Fair
India

Kailash fair, Agra in Uttar Pradesh is a colorful carnival. India is a land of fairs and festi...

India

People of the village of Vithappa in Karnataka hold the Sri Vithappa fair in honor of the epon...

India

Dadri fair is one of the largest fair. The fair site is located at a distance of about 3 km fr...

India


Bhadrapada Ambaji Mela is a multicultural fair where not only Hindus but people from ...

India

Kundri Mela held in Jharkhand is one of the very popular cattle fairs in the state. As a state...

India

Situated in Chandangaon, Shri Mahavirji Fair of Rajasthan takes place in the Hindu month of Ch...

India

The Urs Fair is dedicated to Khwaja Moin-ud-din Chishti, the Sufi saint. It is organized on th...

Articles
Copyright © FestivalsZone. All Rights Reserved.